CBI की छापेमारी में गायब मिले उपकरण, पूर्व निदेशक समेत कई अधिकारी जांच के घेरे में।
देहरादून —: ऋषिकेश स्थित एम्स (AIIMS) में करोड़ों रुपये के घोटाले का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि कोरोनरी केयर यूनिट (CCU) की स्थापना के दौरान बड़ी अनियमितताएँ हुईं, जिसके चलते 2.73 करोड़ रुपये का भ्रष्टाचार उजागर हुआ। इस मामले में सीबीआई (CBI) ने जांच शुरू कर दी है और पूर्व निदेशक डॉ. रविकांत, अतिरिक्त प्रोफेसर डॉ. राजेश पसरीचा और तत्कालीन स्टोर कीपर रूप सिंह को आरोपी बनाया गया है।
CBI की छापेमारी
सूत्रों के अनुसार 26 मार्च 2025 को सीबीआई की टीम ने कार्डियोलॉजी विभाग में छापा मारा। जांच के दौरान कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए—
- कई वस्तुएँ रजिस्टर में दर्ज नहीं थीं या पूरी तरह से गायब मिलीं।
- कुछ उपकरण अधूरे और गुणवत्ताहीन पाए गए।
- ठोस सामग्री, छत पैनल और मल्टी पैरामीटर मॉनिटर जैसी वस्तुएँ मौके पर उपलब्ध नहीं थीं।
ठेकेदार को अनुचित लाभ का आरोप
जांच में पाया गया कि मेसर्स प्रो मेडिक डिवाइसेस, नई दिल्ली नामक कंपनी को अनुचित लाभ पहुँचाया गया। इस कंपनी के मालिक पुनीत शर्मा का अब निधन हो चुका है।
मामला दर्ज़
सीबीआई ने पूरे प्रकरण को “लोक सेवा में पद का दुरुपयोग” और भ्रष्टाचार की धाराओं के अंतर्गत दर्ज किया है। मामले की गहन जांच जारी है और यह देखना होगा कि आगे इस घोटाले में कौन-कौन जिम्मेदार साबित होता है।

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