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सबूतों के अभाव में बच्ची के हत्यारोपी बरी -
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सबूतों के अभाव में बच्ची के हत्यारोपी बरी

नन्ही कली हत्याकांड: सुप्रीम कोर्ट ने सबूतों में खामियां पाकर मुख्य आरोपी को किया बरी।

वह नारी जिसने पर्यावरण के लिए ना मात्र क़दम उठाया बल्कि एक आंदोलन को जन्म दिया, गौरा देवी वह नारी जिसने चिपको आंदोलन की शुरुआत की।

पिथौरागढ़/हल्द्वानी —: उत्तराखंड के चर्चित नन्ही कली हत्याकांड (2014) में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने मुख्य आरोपी अख्तर अली और सह आरोपी प्रेमपाल को सबूतों की कमी के चलते बरी कर दिया। इससे पहले निचली अदालत और हाईकोर्ट ने अख्तर अली को मौत की सज़ा और प्रेमपाल को 5 साल कैद की सज़ा सुनाई थी।

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क्या था मामला

साल 2014 में हल्द्वानी के बनभूलपुरा इलाके से सात वर्षीय बच्ची का अपहरण कर उसके साथ दुष्कर्म और हत्या की गई थी। इस घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था और बच्ची को ‘नन्ही निर्भया’ नाम से जाना जाने लगा। जांच के बाद पुलिस ने तीन लोगों को आरोपी बनाया था। ट्रायल कोर्ट ने दो को दोषी करार दिया, जबकि एक आरोपी को बरी कर दिया था।

हाईकोर्ट का फैसला

2019 में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा और अख्तर अली की फांसी की सज़ा पर मुहर लगा दी थी।

सुप्रीम कोर्ट का निर्णय

मामला सुप्रीम कोर्ट पहुँचा, जहां सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि—

  • डीएनए रिपोर्ट में गंभीर खामियां थीं।
  • ‘लास्ट सीन’ थ्योरी कमजोर पाई गई।
  • जांच में प्रक्रियागत चूक और सबूतों की कड़ी टूटने की वजह से दोष सिद्ध नहीं हो सका।

इसी आधार पर अदालत ने अख्तर अली और प्रेमपाल को बरी कर दिया।

जनभावनाओं में आक्रो

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सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद पीड़ित परिवार और क्षेत्रीय लोगों में आक्रोश की लहर है। लोगों का कहना है कि इस तरह के मामलों में दोषियों को तकनीकी खामियों की आड़ में छूट मिलना न्याय व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है।

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