भारी बारिश से सहस्रधारा और मालदेवता सबसे अधिक प्रभावित, तामसा नदी ने बदला रौद्र रूप; 15 की मौत, 16 लोग लापता, सैकड़ों फंसे; राहत-बचाव कार्य तेज़।
देहरादून —: देर रात हुई भारी बारिश और क्लाउड बर्स्ट ने देहरादून एवं आस-पास के क्षेत्रों में भयंकर तबाही मचा दी है। नदी-नाले उफान पर हैं, पौने-पूरे शहर के इलाकों में सड़कें क्षतिग्रस्त, मकान बहने लगे हैं और सामान्य जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।
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प्रभावित इलाक़े
- सहस्रधारा और मालदेवता सबसे ज़्यादा प्रभावित स्थान हैं। सहस्रधारा में 24 घंटे में लगभग 192 मिमी बारिश, मालदेवता में करीब 141.5 मिमी दर्ज हुई।
- टैपकेश्वर महादेव मंदिर के बगल वाली तासमा नदी बाढ़ के कारण मंदिर परिसर में पानी भर गया, और हनुमान की प्रतिमा तक पानी पहुँच गया।
- देवभूमि इंस्टिट्यूट पौंधा इलाके में पानी भरने से लगभग 200-400 छात्रों को बचाया गया।
- मेलानी-मुस्सोड़ी व अन्य ग्रामीण इलाक़े भी प्रभावित हुए जहां मकान, दुकाने और सड़कें भारी क्षति झेल रही हैं।
जान-माल की हानि
- मृतकों की संख्या 13-15 के बीच है, जबकि 16 लोग लापता बताए जा रहे हैं।
- अनेक लोग सड़क, पुल या अन्य मार्ग टूटने के कारण फंसे हुए हैं, कुल मिलाकर लगभग 900 लोग विभिन्न जगहों पर फंसे हुए बताए जा रहे हैं।
- दुकानों, होटलों और अन्य निजी-सार्वजनिक संपत्तियों को भारी नुकसान हुआ है। एनी सार्वजनिक संपत्तियों जैसे सड़कें, पुल, सरकारी भवन आदि को भी क्षति पहुँची है।
राहत एवं बचाव कार्य
- SDRF, NDRF और स्थानीय प्रशासन ने प्रभावित जगहों पर बचाव कार्य शुरू कर दिया है। कई लोग सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किए गए हैं।
- मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया, अधिकारियों को त्वरित राहत और पुनर्स्थापना के आदेश दिए।
- स्कूल-कालेज बंद, आंगनवाड़ी केंद्र बंद रखे गए हैं, बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए यह कदम उठाया गया है।
- मौसम विभाग (IMD) ने अगले 5 दिनों के लिए भारी बारिश की चेतावनी जारी की है।
चुनौतियाँ एवं आगे का रास्ता
- सड़कों, पुलों और आधारभूत संरचनाओं को हुए भारी नुकसान से आवागमन बाधित हो गया है, जिससे राहत कार्यों में देरी हो सकती है।
- लापता लोगों की तलाश अभी जारी है, और मौसम खराब रहने के कारण खोज-बचाव कार्य खतरों से जुड़ा हुआ है।
- बाढ़ के बाद सफाई, पीने का पानी, बिजली, परिवहन जैसे बुनियादी सुविधाओं की बहाली तत्काल आवश्यकता है।
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- भविष्य में ऐसी आपदाओं से बचाव हेतु नदी किनारे क्षेत्रों के मानचित्रण, ठोस बाढ़ प्रबंधन योजना, जल निकासी व्यवस्था, स्थानीय चेतावनी तंत्र और संवेदनशील इलाकों में निर्माण नियंत्रण बढ़ाने की जरूरत है।

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