प्राकृतिक आपदाओं से निपटने की तैयारी पर राज्य भर में SDRF, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की संयुक्त मॉक-ड्रिल, कई स्थानों पर भूकंप परिदृश्य का रिहर्सल।
देहरादून — उत्तराखंड सरकार ने राज्य की आपदा-तैयारी बढ़ाने के उद्देश्य से आज भूकंप-मॉक ड्रिल (काल्पनिक भूकंप अभ्यास) शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर यूएसडीएमए (Uttarakhand State Disaster Management Authority) ने पूरे राज्य के 13 जिलों में यह अभ्यास आयोजित किया है।
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ड्रिल की रूपरेखा और उद्देश्य
मॉक ड्रिल सुबह आयोजित है, जिसमें सभी जिलों में आपदा-प्रतिक्रिया तंत्र (Incident Response System – IRS) के तहत अभ्यास होगा। इससे केंद्र और राज्य की एजेंसियों (जैसे SDRF, PRD, स्वास्थ्य विभाग, अग्निशमन आदि) के बीच समन्वय (coordination) को परखा जाएगा ताकि वास्तविक आपदा के समय राहत-कार्रवाई अधिक त्वरित और असरदार हो सके। ड्रिल में बहुमंजिला इमारतों के गिरने, पुलों या बांधों की विफलता, भूस्खलन और बाढ़ जैसी परिदृश्यों का भी सिमुलेशन किया जाएगा। इसके अलावा, राहत शिविरों का सेटअप, सुरक्षित मार्गों की पहचान, और विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों, महिलाओं और दिव्यांगों के लिए आपातकालीन प्रबंधन की योजना बनाई गई है।
तकनीकी चुनौतियाँ और सुधार
यूएसडीएमए ने आईआईटी रूड़की के सहयोग से भूकंप चेतावनी प्रणालियों को मजबूत किया है:
सेंसर और सायरन की संख्या बढ़ाई जा रही है।
भूदेव ऐप (BhooDev App) विकसित किया गया है, जो रिक्टर पैमाने पर 5 मैक्निट्यूड से अधिक तीव्रता वाले भूकंप का अलर्ट मोबाइल फोन पर भेजेगा।
देहरादून में विशेष तैयारी
देहरादून जिले में मॉक ड्रिल सुबह 9:30 बजे से होगी, और 10 अलग-अलग स्थानों पर इमरजेंसी सायरन बजाए जाएंगे। जिला प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि सायरन की आवाज सुनकर घबराएँ नहीं, क्योंकि यह केवल अभ्यास है। इस अभ्यास में पुलिस, SDRF, एनडीआरएफ, अग्निशमन दल, स्वास्थ्य विभाग, PRD आदि सभी प्रमुख एजेंसियाँ भाग लेंगी।
स्थानीय जिला-स्तर की तैयारी
चंपावत जिला में आठ स्थानों को चिन्हित किया गया है जहाँ मॉक ड्रिल आयोजित की जाएगी। गोरलचौड़ मैदान को “स्टेजिंग एरिया” के रूप में निर्धारित किया गया है, जहाँ आपदा-प्रतिक्रिया टीमों का समन्वय होगा।
प्रशासन की अपील और सावधानियाँ
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जिला प्रशासन ने जनता से निवेदन किया है कि 15 नवंबर की सुबह तेज सायरन की आवाज सुने जाने पर कोई घबराहट न हो। यह ड्रिल सिर्फ एक अभ्यास है, लेकिन इसकी सफलता आपदा-प्रबंधन प्रणाली की वास्तविक क्षमता बढ़ा सकती है और जीवन-रक्षा की संभावनाओं को मजबूत कर सकती है।

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