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बिजली उपभोक्ताओं में स्मार्ट मीटर से नाराज़गी -

बिजली उपभोक्ताओं में स्मार्ट मीटर से नाराज़गी

स्मार्ट मीटर से बिजली उपयोगकर्ताओं में भारी नाराज़गी

वह नारी जिसने पर्यावरण के लिए ना मात्र क़दम उठाया बल्कि एक आंदोलन को जन्म दिया, गौरा देवी वह नारी जिसने चिपको आंदोलन की शुरुआत की।

नैनीताल -: उत्तराखंड में समय-समय पर लगाए जा रहे स्मार्ट मीटर अब उपभोक्ताओं के लिए परेशानी का कारण बनते दिख रहे हैं। अधिकारियों ने इन मीटरों को सही और पारदर्शी बिलिंग के लिए उपयोगी बताया था, लेकिन जमीन पर लोग इससे संतुष्ट नहीं हैं।

बिलों में भारी वृद्धि

🔹 एक परिवार का मामला:
हेमा मेहता के घर में केवल 44 दिनों के उपयोग का बिजली बिल ₹18,937 आया, जबकि वहाँ दो कमरों का छोटा घर है और खपत बहुत कम होती है।

अन्य शिकायतें:

  • कुछ लोगों के एक महीने का बिल लगभग ₹8,000 तक पहुँच गया।
  • 45 दिनों में किसी को ₹16,000 का बिल मिला।
  • दो महीने में किसी का ₹13,000 का बिल आया।

ग्रामीणों का कहना है कि पहले पुराने मीटर पर इतना बिल कभी नहीं आता था और कम खपत होने पर भी इस स्मार्ट सिस्टम में महँगा बिल आ रहा है।

उपभोक्ताओं की प्रतिक्रिया

ग्रामीण काफी नाराज़ हैं और उन्होंने बिजलीघर पर जाकर एसडीओ का घेराव किया और समस्या का समाधान माँगा।
बहुतों का कहना है कि अगर यही समस्या बनी रही तो वे कह रहे हैं,

“कनेक्शन ही काट दीजिए, इससे तो लालटेन और लैंप के दिन बेहतर थे।”

बिजली निगम का जवाब

ऊर्जा निगम के वरिष्ठ अधिकारी (एसडीओ) दीपक पाठक ने कहा कि नए स्मार्ट मीटर और पुराने मीटर की रीडिंग में अंतर हो सकता है। उन्होंने कहा कि समस्या की जाँच के लिए मीटर की MRI तकनीकी जाँच एवं डेटा विश्लेषण किया जाएगा और आवश्यक तकनीकी जांचें की जाएँगी।

मुद्दा क्या है?

  • स्मार्ट मीटर को प्रीपेड प्रणाली में बदला गया है, जिससे खपत कम होने पर भी ज़्यादा बिल आने की शिकायतें बढ़ी हैं।

  • प्रीपेड सिस्टम में बैलेंस नकारात्मक होने पर कनेक्शन कटने का डर भी उपभोक्ताओं को सताता है।

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