यमुनोत्री हाईवे 19 दिनों से बंद, ग्रामीणों तक गैस सिलिंडर और राशन पहुँचाने में प्रशासन को खच्चरों का सहारा लेना पड़ा।
उत्तरकाशी —: यमुनोत्री हाईवे पिछले 19 दिनों से बंद होने के कारण यमुनाघाटी के ग्रामीणों को भारी दिक़्क़तों का सामना करना पड़ रहा है। सड़क मार्ग बाधित होने से गाँवों में ज़रूरी सामान और रसोई गैस सिलिंडर पहुँचाना मुश्किल हो गया है। प्रशासन ने अब खच्चरों के सहारे रसद और सिलिंडर की आपूर्ति शुरू की है।
ग्रामीणों तक पहुँचा राशन और गैस
- खरसाली गाँव में 82 रसोई गैस सिलिंडर और 34 पैकेट राशन सामग्री भेजी गई।
- बनास गाँव के ग्रामीणों तक 109 पैकेट रसद सामग्री पहुँचाई गई।
- नारायणपुरी गाँव के लिए भी आवश्यक सामान और गैस सिलिंडर भेजने की तैयारी की जा रही है।
मार्ग खोलने की कोशिशें
यमुनोत्री हाईवे पर बनास के पास बड़े-बड़े बोल्डर और मलबा गिरने से आवाजाही पूरी तरह ठप हो गई है। सड़क खोलने के लिए पोकलेन मशीन और कम्प्रैशर मशीन भेजी जा रही हैं। वहीं हनुमानचट्टी के पास पहाड़ी से लटके बोल्डरों को हटाने का काम चल रहा है ताकि जल्द से जल्द मार्ग सुचारु हो सके।
ग्रामीणों की मुश्किलें
गाथा उत्तराखण्ड की वीरांगना तीलु रौतेली की, मात्र 15 वर्ष की आयु में दुश्मनों को चटाई धूल।
हाईवे बंद होने से यमुनोत्री धाम समेत आसपास के आधा दर्जन गाँवों में लोगों को रोजमर्रा की चीजों की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है। अब खच्चरों के ज़रिये सामान पहुँचने से लोगों को अस्थायी राहत मिली है, लेकिन सभी की नज़रें सड़क बहाल होने पर टिकी हुई हैं।

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