नेपाल मूल के लोग भारतीय नागरिक होने पर अब प्रमाण पत्र देना होगा
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उत्तराखंड (सीमावर्ती क्षेत्र): सीमा पर पहचान नियमों में बदलाव की तैयारी
उत्तराखंड में केंद्र सरकार और स्थानीय प्रशासन ने सीमा के पास रहने वाले कुछ नेपाल मूल के निवासियों के लिए नागरिकता पहचान को लेकर नए नियम लागू करने का निर्णय लिया है। इसके तहत अब उन लोगों को अपनी भारतीय नागरिकता साबित करने के लिए विशेष प्रमाण पत्र पेश करना आवश्यक होगा।
किसके लिए प्रमाण पत्र जरूरी होगा?
वहीं के आसपास के इलाके में कई ऐसे लोग रहते हैं, जिन्हें नेपाल से भारत में जन्म या लंबे समय से रहते हुए नागरिकता मिली है या उनके पास पहचान से जुड़े दस्तावेज हैं। नई व्यवस्था में ऐसे लोगों से कहा जा रहा है कि वे अपनी नागरिकता को पुष्टि करने के लिए आवश्यक प्रमाण पत्र या दस्तावेज पेश करें ताकि प्रशासन उनके नागरिक होने की पुष्टि कर सके।
पहचान और यात्रा नियमों की पृष्ठभूमि
भारतीय और नेपाली नागरिकों के बीच की सीमा खुले रूप से पार की जा सकती है और उन्हें वीज़ा या पासपोर्ट की आवश्यकता नहीं होती है जब वे भारत-नेपाल सीमा से सीधे आते हैं। ऐसी छूट अंतरराष्ट्रीय नियमों और समझौतों के तहत दी गई है, लेकिन अब पहचान और नागरिकता सत्यापन को लेकर ज़्यादा स्पष्टता और नियंत्रण लाने की कोशिश की जा रही है।
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प्रशासन की तैयारी और दिशा निर्देश
स्थानीय प्रशासन सीमा पर निवास करने वाले लोगों के रिकॉर्ड, पहचान दस्तावेजों और नागरिकता सत्यापन की प्रक्रिया को सख्त करने की दिशा में काम कर रहा है ताकि किसी भी प्रकार की पहचान की भ्रमित स्थिति से बचा जा सके। अधिकारी यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि केवल वही लोग जो वास्तव में भारतीय नागरिक हैं वे नागरिकता के साबुत लाभ प्राप्त कर सकें।
समुदाय और सामाजिक प्रभाव
यह बदलाव सीमावर्ती इलाकों में बसे नेपाली मूल के निवासियों और पारिवारिक सामाजिक संरचना पर असर डाल सकता है। कई परिवारों में तो वहाँ के स्थानीय लोग लंबे समय से रहते हैं और मुख्य पहचानपत्रों के रूप में प्रमाण पत्र का इस्तेमाल करते आए हैं। नए नियमों के तहत उन्हें उन दस्तावेजों को अपडेट कराना होगा।
