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खीरगंगा की बाढ़ में बहा कल्पकेदार मंदिर का ऊपरी हिस्सा -
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खीरगंगा की बाढ़ में बहा कल्पकेदार मंदिर का ऊपरी हिस्सा

धराली की पहचान रहे जलमग्न शिवलिंग रूपी प्राचीन मंदिर का गर्भगृह मलबे में दबा होने की आशंका, विस्तारीकरण के दौरान मिले थे 240 प्राचीन मंदिरों के अवशेष।

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उत्तरकाशी -: उत्तराखंड के उत्तरकाशी ज़िले के धराली क्षेत्र में स्थित प्राचीन कल्पकेदार मंदिर की पौराणिक आस्था को उस वक्त बड़ा आघात पहुंचा जब खीरगंगा नदी में अचानक आए भीषण सैलाब ने मंदिर के ऊपरी ढांचे को अपनी चपेट में लेकर बहा दिया।

हालांकि मंदिर का गर्भगृह ज़मीन से लगभग 7 मीटर नीचे स्थितथा, जिससे संभावना जताई जा रही है कि वह मलबे में दबा हुआहो सकता है। लेकिन मंदिर के मुख्य स्वरूप के बह जाने से क्षेत्र में आस्था और सांस्कृतिक विरासत को अपूरणीय क्षतिपहुंची है।

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मंदिर का महत्व और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

धराली गांव की पहचान ही कल्पकेदार मंदिर से जुड़ी थी। गंगोत्री हाईवे से मात्र 50 मीटर की दूरी पर स्थित यह मंदिर “जलमग्न शिवलिंग”के रूप में जाना जाता था। गंगोत्री और यमुनोत्री धाम की यात्रा पर आने वाले हजारों तीर्थयात्री यहां रुककर भगवान शिव के इस दिव्य रूप के दर्शन अवश्य करते थे।

विस्तारीकरण के दौरान मिले थे 240 मंदिरों के अवशेष

कल्पकेदार मंदिर समिति की ओर से मंदिर का विस्तारीकरण कार्यचल रहा था। इस कार्य के अंतर्गत जब मंदिर की सीढ़ियों के आसपास खोदाई की गई, तो उस दौरान प्राचीन कल्पकेदार समूह के करीब 240 छोटे मंदिरों के तराशे हुए अवशेष भी निकल कर आए थे। इससे यह क्षेत्र और भी अधिक धार्मिक व पुरातात्विक रूप से महत्वपूर्ण माना जाने लगा था।

किसी को नहीं था आपदा का अंदेशा

स्थानीय लोग और श्रद्धालु इस अचानक आई त्रासदी से स्तब्ध हैं। किसी को यह अनुमान नहीं था कि मंगलवार को खीरगंगा नदी में इतना भयानक उफान आएगा कि वह मंदिर के ढांचे को ही बहा ले जाएगा। अब मंदिर परिसर और आसपास का समूचा क्षेत्र मलबे से पट गया है।

प्रशासन और पुरातत्व विभाग से अपील

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स्थानीय लोग मंदिर के गर्भगृह को खोजने और मंदिर की पुनर्स्थापना की मांग कर रहे हैं। कई संगठनों ने सरकार और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग से इस स्थल की जांच, सुरक्षा व पुनरुद्धारकी अपील की है।

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